आरती पूजा का वह क्षण है जब पूरा परिवार एक साथ खड़ा होता है, घंटी बजती है और दीपक की ज्योति भगवान को अर्पित की जाती है। इसमें केवल पाँच से दस मिनट लगते हैं और किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
आरती का अर्थ
आरती शब्द संस्कृत के आरात्रिक से जुड़ा माना जाता है, यानी वह अर्पण जो अंधकार दूर करे। हम भगवान के सामने ज्योति घुमाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रकाश अर्पित करते हैं और फिर उसी ज्योति को आशीर्वाद के रूप में आँखों और माथे से लगाते हैं।
आरती की थाली में क्या रखें
- दीपक: घी और रुई की बाती वाला पीतल या मिट्टी का दीया
- कपूर
- रोली, हल्दी और अक्षत
- फूल और पंखुड़ियाँ
- अगरबत्ती या धूप
- घंटी
- जल का लोटा और चम्मच
- प्रसाद: फल, मिश्री या लड्डू
आरती करने की विधि
- स्वच्छता। हाथ-पैर धोकर पूजा स्थान साफ करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें।
- धूप और दीप जलाएँ। पहले अगरबत्ती, फिर दीपक जलाएँ। भगवान को फूल और तिलक अर्पित करें।
- पहले गणेश जी। शुरुआत जय गणेश देवा से करें, क्योंकि गणेश जी प्रथम पूज्य हैं।
- थाली और घंटी। दाएँ हाथ में थाली और बाएँ हाथ में घंटी लें।
- घड़ी की दिशा में घुमाएँ। चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरे स्वरूप पर सात बार।
- मुख्य आरती गाएँ। जिस देवता की पूजा की हो उनकी आरती, या ॐ जय जगदीश हरे गाएँ। हमारे आरती मोड से पंक्ति-दर-पंक्ति साथ गा सकते हैं।
- कपूर और कर्पूरगौरं। अंत में कपूर जलाकर कर्पूरगौरं मंत्र बोलें।
- जल घुमाएँ। एक चम्मच जल थाली के चारों ओर घुमाएँ।
- आरती लें। सभी सदस्य दोनों हथेलियाँ ज्योति पर घुमाकर आँखों और माथे से लगाएँ।
- प्रसाद बाँटें।
ध्यान रखने योग्य नियम
- दीपक को मुँह से फूँककर न बुझाएँ।
- थाली को छाती के स्तर या उससे ऊपर रखें।
- आरती सदा घड़ी की दिशा में करें।
- मुख्य दीपक में शुद्ध घी का प्रयोग करें; शनिदेव और हनुमान जी के लिए सरसों या तिल का तेल भी प्रयोग होता है।
कौन सी आरती गाएँ?
सप्ताह के दिन के अनुसार आरती चुनने के लिए पढ़ें: किस दिन कौन सी आरती करें। अंत में ॐ जय जगदीश हरे गाना सदैव शुभ है।
यह भी पढ़ें: आरती में आम गलतियाँ और कर्पूरगौरं मन्त्र का अर्थ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती की थाली कितनी बार घुमानी चाहिए?
प्रचलित परम्परा के अनुसार चरणों में चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और पूरे स्वरूप पर सात बार, घड़ी की दिशा में।
क्या बिना पंडित के आरती कर सकते हैं?
हाँ, दैनिक आरती घर का कोई भी सदस्य श्रद्धा से कर सकता है।