जय गणेश जय गणेश देवा आरती
बोल सबसे प्रचलित रूप में दिए गए हैं। क्षेत्र अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
जय गणेश जय गणेश देवा आरती का अर्थ
आरती में गणेश जी को माता पार्वती और पिता महादेव का पुत्र बताया गया है। वे एकदन्त, दयावन्त और चार भुजाधारी हैं, माथे पर सिन्दूर सोहता है और मूषक उनकी सवारी है।
भक्त पान, फूल, मेवा और लड्डुओं का भोग लगाते हैं। गणेश जी अंधों को आँख, कोढ़ियों को निरोगी काया, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देते हैं।
अंत में कवि सूर श्याम की शरण में आकर सेवा सफल करने की प्रार्थना करते हैं और भक्त दीनों की लाज रखने तथा मनोकामना पूर्ण करने की विनती करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जी की आरती सबसे पहले क्यों होती है?
गणेश जी प्रथम पूज्य हैं, इसलिए हर कार्य बिना विघ्न के पूरा हो, इसके लिए पहले उनकी पूजा और आरती होती है।
जय गणेश देवा किसने लिखी?
अंतिम पद में "सूर श्याम" का नाम आता है, इसलिए परम्परा से इसे सूरदास जी की रचना माना जाता है।
गणेश आरती किस दिन करें?
बुधवार और हर माह की चतुर्थी तिथि विशेष शुभ मानी जाती है।