आरती कीजै हनुमान लला की
बोल सबसे प्रचलित रूप में दिए गए हैं। क्षेत्र अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
आरती कीजै हनुमान लला की का अर्थ
भक्त सबको हनुमान लला की आरती करने के लिए बुलाता है, जो रघुनाथ जी की शक्ति हैं और दुष्टों का दलन करते हैं। उनके बल से पर्वत काँपते हैं और रोग-दोष निकट नहीं आते।
अंजनि पुत्र महाबलदायी और संतों के सदा सहायक हैं। श्रीराम के भेजे वे पल भर में समुद्र लाँघकर लंका जला आए और सीता जी की सुधि लाए। लक्ष्मण मूर्छित हुए तो संजीवनी लाकर प्राण बचाए।
पाताल में जाकर उन्होंने अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ीं। बाएँ हाथ से असुर मारे और दाएँ से संत तारे। सुर-नर-मुनि और स्वयं माता अंजना उनकी आरती करती हैं। जो यह आरती गाता है वह बैकुंठ में बसकर परमपद पाता है। अंतिम पद में तुलसीदास जी प्रभु की कीर्ति गाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान जी की आरती किस दिन करें?
मंगलवार और शनिवार सबसे शुभ हैं। शनिवार की हनुमान पूजा शनि दोष में भी लाभकारी मानी जाती है।
क्या चालीसा के बाद आरती करें?
हाँ, सामान्य क्रम है: हनुमान चालीसा, फिर इच्छा अनुसार बजरंग बाण या सुंदरकांड, और अंत में आरती।
आरती में हनुमान जी को क्या चढ़ाएँ?
चमेली के तेल में सिन्दूर, लाल फूल, बूंदी या बेसन के लड्डू और घी या सरसों के तेल का दीपक।