जय जय श्री शनिदेव आरती
बोल सबसे प्रचलित रूप में दिए गए हैं। क्षेत्र अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
जय जय श्री शनिदेव आरती का अर्थ
आरती में भक्तों का हित करने वाले शनिदेव की जय है, जो सूर्य पुत्र हैं और छाया उनकी माता हैं। श्याम अंग, वक्र दृष्टि, चतुर्भुज रूप, नीलाम्बर और गज की सवारी है।
शीश पर मुकुट और गले में मोतियों की माला है। मोदक, मिष्ठान, पान और सुपारी चढ़ते हैं; लोहा, तिल, तेल और उड़द उन्हें अति प्रिय हैं।
देव, दानव, ऋषि-मुनि और नर-नारी सब उनका स्मरण करते हैं। भक्त अंत में उनकी शरण लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनिदेव को क्या चढ़ाएँ?
सरसों का तेल, काले तिल, उड़द, लोहे की वस्तु और नीले फूल, जैसा आरती में भी कहा गया है।
क्या साढ़े साती में शनि आरती करनी चाहिए?
शनिवार को शनि आरती, शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ परम्परा से शांति के लिए किया जाता है।
शनिदेव के माता-पिता कौन हैं?
वे सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं।