महाशिवरात्रि, यानी “शिव की महान रात्रि”, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (अमान्त पंचांग) को मनाई जाती है, जो अधिकतर फरवरी-मार्च में आती है। भक्त व्रत रखते हैं, शिवजी की पूजा करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। घर पर इसे मनाने का सरल तरीका यहाँ है।
शुरू करने से पहले
- स्नान कर स्वच्छ, हो सके तो सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
- साफ चौकी पर शिवलिंग या शिवजी का चित्र रखें।
- सामग्री: ताँबे या पीतल का लोटा, जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, सफेद फूल, धूप, दीपक और कपूर।
सरल अभिषेक
- “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ।
- कच्चा दूध चढ़ाएँ और फिर जल से स्नान कराएँ।
- बेलपत्र का चिकना भाग नीचे रखकर चढ़ाएँ। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शुभ माना जाता है।
- सफेद फूल चढ़ाएँ और धूप-दीप जलाएँ।
परम्पराओं में कुछ भेद होते हैं। यदि निश्चित न हों तो जल, बेलपत्र और श्रद्धा से मन्त्र-जप पर्याप्त है।
रात्रि पूजा
परम्परा में रात्रि को चार प्रहरों में बाँटा जाता है और कुछ भक्त हर प्रहर में छोटी पूजा करते हैं। घर पर सूर्यास्त के समय और मध्यरात्रि के आसपास पूजा करके बीच में भजन या जप किया जा सकता है।
आरती
हर पूजा के अन्त में थाली घड़ी की दिशा में घुमाते हुए ॐ जय शिव ओंकारा गाएँ और फिर कर्पूरगौरं मन्त्र बोलें। सोमवार भी शिवजी का दिन है; देखें किस दिन कौन सी आरती करें।
व्रत
कई भक्त फल, दूध और जल लेते हैं और कुछ निर्जल व्रत रखते हैं। अस्वस्थ, गर्भवती, बुज़ुर्ग या मधुमेह के रोगी कठोर व्रत न रखें; फल और दूध स्वीकार्य विकल्प है। व्रत अगले दिन सुबह पूजा के बाद खोला जाता है।
ध्यान रखें
वातावरण शान्त रखें। इस दिन झगड़े, शराब और मांसाहार से दूर रहें। मन्दिर न जा सकें तो घर की श्रद्धापूर्ण पूजा भी उतनी ही मान्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाशिवरात्रि पर कौन सी आरती गाई जाती है?
ॐ जय शिव ओंकारा सबसे प्रचलित है, इसके बाद कर्पूरगौरं मन्त्र बोला जाता है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?
जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, सफेद फूल और कुछ परिवार शहद व दही भी। परम्परा में तुलसी और हल्दी शिवजी को नहीं चढ़ाई जाती।
क्या पूरी रात जागना अनिवार्य है?
कई भक्त भजन के साथ जागरण करते हैं, पर यह व्यक्तिगत चुनाव है। श्रद्धा से पूजा और मन्त्र-जप भी पर्याप्त है।