श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
बोल सबसे प्रचलित रूप में दिए गए हैं। क्षेत्र अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन का अर्थ
तुलसीदास जी अपने मन से कहते हैं: हे मन, कृपालु श्री रामचन्द्र जी का भजन कर, जो संसार के दारुण भय को हरते हैं। उनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण नवीन लाल कमल जैसे हैं।
उनकी छवि अनगिनत कामदेवों से अधिक सुन्दर है, नए नीले मेघ जैसी। पीताम्बर बिजली जैसा चमकता है। ऐसे पवित्र जानकी पति को मैं नमन करता हूँ।
दीनबन्धु, दैत्य वंश का नाश करने वाले, रघुकुल के आनन्दकन्द, कोशल के चन्द्र और दशरथ नन्दन का भजन कर। मुकुट, कुण्डल, तिलक और आभूषणों से सजे, आजानु भुजाओं में धनुष-बाण लिए खर-दूषण विजेता प्रभु मेरे हृदय कमल में निवास कर काम आदि दुष्टों का नाश करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री रामचन्द्र कृपालु किसने लिखी?
गोस्वामी तुलसीदास जी (1532–1623) ने, अपनी विनय पत्रिका में।
यह आरती है या स्तुति?
यह स्तुति है, पर श्रीराम की आरती के रूप में व्यापक रूप से गाई जाती है।
इसकी भाषा कौन सी है?
विनय पत्रिका की तरह यह संस्कृतनिष्ठ ब्रजभाषा में है, इसलिए संस्कृत जैसी लगती है।